#Kavita by Gaurav Gupta

एक घूट इश्क

चाय..! तो उनका बस एक बहाना,
मकसद तो है कुछ वक्त बिताना….

मिश्री नही बस प्रेम का दाना,
उंगली से उनका वो प्रेम घुलाना….

हाथों-हाथ यूँ कप का मिलना,
पुष्कर में जैसे कमल का खिलना..

नज़रे छुपा के यूँ नज़रे मिलना,
धीरे से उनका यूँ ही मुस्कुराना……

उफ़… हाथों की गर्मी या चाय की गर्माहट
याद दिलाती उनकें जिस्म की आहट….

उंगली फसा के यूँ कप का उठाना,
याद है उनकी जिल्फ़े का सुलझाना…..

पलकें झुका के वो भाप उड़ाना,
भाप में दोनों दिलों का मिलना….

एक घूट… मेरे गले से यूँ उतरे,
सुखी धरा पर गंगा यूँ उतरे……..
गौरव गुप्ता
महेश नगर, लालगंज रायबरेली
7754828698

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