#Kavita by Gaurav Gupta

दीवाली का चाँद

दीपों को यूँ आहट लिये,
एक चाँद जो छत पे निकला है…
अम्बर की इस देहरी को,
कुछ दीपों से महकानें को…..

इंद्रधनुष के बाण लिए,
इस धरा पे वो चलाती है..
कहिं रंगोली-सी बन जाये,
कभी मिटा के फिर मुस्काती है।।

एक चहरा खिलता कलियों – सा
नूरानी जिस्म अदाओं से….
कोई टीका तो लगाओ ज़रा,
कहिं नज़र न इसको लग जाये…….!!
* गौरव गुप्ता*
महेश नगर लालगंज रायबरेली
7754828698

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