#Kavita by Gaurav Gupta

नेता ही कहूँ या चोर कहूँ…

तर्पण ही कहूँ या व्यापार कहूँ

इस भोली भाली जनता का

सौभाग्य नही दुर्भाग्य कहूँ…

 

इन राजनीति की गलियों से

जितने ही दीमक उपजे है

शहद सत्ता पा पीते है,

और राष्टद्रोह भी निभाते है।

 

है चोर सही या साँप कहूँ,

मत पानकर जो इस जनता का

जनता को ही तो डसते है।

है सांप सही नेता न कहूँ………..!!

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