#Kavita by Gaurav Gupta

आठवां वचन

तुम चलें हो मेरे साथ कभी,
यूँ हाथ में लेकर हाथ तभी,
इन साँसों की पगडण्डी पर,
लों थाम तो मेरा हाथ अभी……

एक पग जो मेरे साथ चलो,
अर्धांग्नी तुम्हारी बन जाऊं,
मैं उम्र तुम्हीं को दे दूंगी,
सांसो तक अपना बना रखों…..

सीता को धारण कर लूँ मैं,
एक-आठ वचन तो तुम भी दो,
इस लोक जगत की बातों में,
कहिं राम न तुम भी बन जाना…..

जब दूंगी अग्नि परीक्षा मैं
तब साथ मेरा तुम दोगें न,
मर्यादा सीमा तोड़ कें तुम,
मेरे साथ परीक्षा देंदेना……..
गौरव गुप्ता
महेश नगर, लालगंज रायबरेली
7754828698

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