#Kavita by Gaurav Gupta

कन्यादान

कुछ चेकों में,
राशियां अभी रिक्त है….
कुछ राशियों की मोटी राशि,
का आना जो बाकी है….

यूँ तो आशियानें को,
भटकना है दर-बदर,
पर दान में दो-चार पहियों,
की ख़याहिर बाकी है…..

वो दिलाता है,
हर खिलौने को उसको,
बस एक आख़री ही,
खिलौने का दिलाना बाकी है…..

लगेंगी बाजारों में,
अपने खून की बोलियाँ,
बस थोड़ा-सी उम्र ही तो,
कम करना बाकी है……

हमाम की नग्नता भी,
लज्जित हुई होगी,
जब उतारा है तुमने,
भीख का पिटारा…..

जो फीते से नापी है,
किसी आँगन की गुड़िया,
उसके हाथों से कुछ हाथ,
भी तो खाना बाकी है…..

जो कालिख़ से मिलाइ है,
कपास-सी जोड़ी,
उसी के रमकें,
तुमसे परायापन बाकी है…..

जो तकल पहुँचोगे,
चौथे पहर को तुम भी,
उस माप के कुछ छाप,
मिलना बाकी है……

गौरव गुप्ता
महेश नगर लालगंज रायबरेली।
7754828698

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