#Kavita by Gaya Prasad , Rajat

सब देवों का आशीष तेरी एक दृष्टि से कम है माँ।

तेरा आँचल साथ नही है तो  मेरी आँखें नम हैं माँ।

तेरी ममता समता जैसा वट बृक्ष नही पाया जग में,

तेरे वरद हस्त की छाया शीतल अमृत सम है  माँ।

 

***

 

गंगा तट पर मैं खड़ा हूँ .

गंगा लहरें देखता हूँ .

आचमन को हाथ में जल ,

चले आओ,चले आओ

अजी तुम चले भी आओ .

चकोरी को मिला अब चाँद है .

प्रीति उसकी हो गयी आबाद है .

लहर पर अक्स मेरा हिल रहा ,

हार में भी जीत की फरियाद है .

प्रीति घर सुना पड़ा है ,

द्वार पर याचक खड़ा है .

भाव बनबासी हुए है ,

चले आओ चले आओ ,

अजी तुम चले भी आओ .

तोड़कर उपवास छत पर आ गया ,

चाँद चढ़कर किरण रथ पर आ गया .

गलियां सजा दी फूल से मैंने सभी ,

भाव मेरा प्रेम खत पर आ गया ,

तेरे गहनों में प्रीति का जुड़ा जड़ा है ,

प्रेम मेरा नौजवां बो नहीं बूढ़ा बड़ा है ,

वारकर बैठा हूँ दर पे आरती के दीप,

चले आओ चले आओ ,

अजी तुम चले भी आओ .

रजत –आगरा

287 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.