#Kavita by Gayaprasad Rajat

मिलि सब बन्धु जन ,सजा लेवें जनमन,

बेटियों के मन बसे,भय को मिटाइये।

सत्य गणवेश होबे, लज्जा शील भेष होबे,

घोर घनघोर धूप, बेटियाँ बचाइये।

शील आचरण होबे, लाज शर्म चक्षु होबे,

बेटियों को अपनी ये ,ओढ़ना उढाईये

पावन है भैया दौज, नेह की लगाओ पौध,

शीतल हो चन्दन सी, धार वो बहाइये।

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