#Kavita by Gopal Kaushal

नदी के रंग

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काले-स्वेत बादल

मानों  धीरे – धीरे

भू  पर उतर  रहे

लेकर नदी में हिलोरे ।।

खिली – खिली – सी

सूरज  की  किरणें ।

नीर  के आईने में

आई मानों संवरने ।।

साँय – साँय कर

सरिता बहती रहें ।

नाविक ले पतवार

सरिता ने गीत कहें ।।

मझधार में भंवरे यूँ

ही गोतें लगाते  रहे ।

हौसलों से  हीं  हम

नौका पार लगाते रहें ।।

✍ गोपाल कौशल

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