#Kavita by Gopal Kaushal

मृग की अभिलाषा

***

मृग जोड़े का  देख  प्रेम इजहार

वन में आ गई मानों बसंत बहार ।

फुदकते-उछलते कर अठखेलियां

दे रहें संदेश प्यार से  चले संसार ।।

माया मोह का नही  जहां बाजार

न ही होते है इनके पास  औजार ।

फिर भी सुरक्षित नही यह मिलन

न जाने कब कर ले कोई शिकार ।।

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