#Kavita by Gopal Kaushal

मेले

🍢🍡🍡🍢🍬🍧🍦🍹

लोक संस्कृति की पहचान है मेले

सबके मन को भाते  चकरी -झूले ।

गुब्बारों पर निशाने का खेल खेले

कोई खाएं मिष्ठान , जलेबी , केले ।।

बच्चों की जिद के भी क्या कहने

पापा-मम्मी संग खरीदते खिलौने ।

हमारी रसना की लार टपके देख

कुल्फी,पान,पानी-बताशे के ठेले ।।

मेले सिखाते है ,मत चलो अकेले

भाईचारे से खुशियां चहुंओर फैले ।

मेले है हमारी धरोहर,लगते मनोहर

हर्ष-आनंद,उत्सव-महोत्सव है मेले ।।

 

👤 गोपाल कौशल

 

 

 

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