#Kavita by Gopal Kaushal

मानवाधिकार

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कबीरा खडा  आज  बाजार में

जमूरा छा गया हर अखबार में ।

सलीका नही मिल रहा संसार में

खलीफा बन गया मंत्री सरकार में ।।

 

मानवाधिकार मौन खडा बाजार में

दानव आंतक फैला रहें संसार में ।

मानव विश्वास करने लगा हथियार में

जबसे अधिकारों का हनन हुआ घर में ।।

 

अधिकारों की बोली लग गई बाजार में

आज न्याय नही मिलता बिना जुगाड़ के

अपराधी घूम रहें आज शरीफो के भेष में

निर्दोषों को पहुंचाया जाता तिहाड़ में ।।

 

✍ गोपाल कौशल

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