#Kavita by Gopal Kaushal

उत्कर्ष – नववर्ष

 

हे ! नव संवत् तुम्हारा कोटि अभिनंदन

ब्राह्मा जी  ने  किया  चैत्र  में सृष्टि सृजन ।

वर्ष प्रतिपदा का दिन ,चैत्र का महिना

अयोध्या के राम बने राजा दशरथ नंदन ।।

 

हे ! नव संवत्  क्या करुं मैं गुणगान

होय पहले ही दिन शक्ति का आह्वान ।

गुडी पडवा पर चहुंओर विजय ध्वज फहरें

लिए नव उमंग -ऊर्जा ,नव पल्लव – धान ।।

 

हे ! नव संवत् तुम -सा नही कोई दूजा

इसी दिन विक्रम संवत् चहुंओर गूंजा ।

मंदिर-मंदिर आरती होय दीप जले अखंड

माँ दुर्गा,गणगौर माता की घर-घर होय पूजा ।।

 

हे ! नव संवत् का अभिनंदन फूल-पलास

पेडों की कोंपल चली,नव पल्लव की आस ।

आमों की बगिया फली कोयल करें पुकार

भौंरा फूलन रस पिये मस्ती भरा चैत्र मास ।।

 

 

हे ! नव संवत्  दो जन -जन को बुध्दि

परहीत के भावों की हो अनंत वृद्धि ।

मंगलमय हो घर – आंगन , भूमंडल

हो भारत की यश -कीर्ति में अभिवृद्वि ।।

 

✍ गोपाल कौशल   – नागदा जिला धार मध्यप्रदेश – 99814-67300

 

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