#Kavita by Gopal Kaushal

वीरांगना लक्ष्मीबाई
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अश्व पर बैठी मर्दानी
हाथों में लेकर कृपाल ।
पवन वेग-सी गति चल
पडी बन शत्रु का काल ।।

कण-कण में भर ज्वाला
रण में बनी थी वह चंडी ।
इसकी देखकर वीरता
नतमस्तक हुए थे घमंडी ।।

नाना के संग सीखें गुर
युध्द में लडी अकेली थी ।
बरछी , कृपाल , कटारी
ढाल उसकी सहेली थी ।।

कमर में बांध नौनिहाल
जोश से लडी मर्दानी थी ।
आंखों में भरकर रक्त
शत्रु संहार की ठानी थी ।।

जिसकी गाथा गूंज रही
आज भी रण मैदानों में ।
जहाँ खडी है लक्ष्मीबाई
शेरनी-सी बन मर्दानों में ।।

देश की आन-बान-शान
के लिए वह खूब लडी थी ।
वह वीरता का अवतार
नारी शक्ति का प्रमाण थी ।।

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
की वह वीर सेनानी थी ।
अंग्रेज थर्रा गए देख शौर्य
ऐसी वह झांसी की रानी थी ।।

✍🏻 गोपाल कौशल
नागदा जिला धार मध्यप्रदेश
99814-67300

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