#Kavita by Gyanendra Shukla

हवाओँ का रुख आज सही नही है,

घर से निकलकर पास आना सही नही है,

आये थे जिनके पास कभी,

उनको अब बहकाना सही नही है,

रात और दिन जिनके इंतजार में हो,

उनकी याद में डूब जाना सही नही है,

प्यार है या कुछ और बात,

यह बात किसी को बताना ठीक नहीँ है,

जिंदगी उसे जी लेने दो अब,

उसको अब याद करना अब ठीक नही है। —–@#ज्ञानेंद्र

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