#Kavita by Gyanendra Shukla

आहिस्ता चलो जिंदगी की डगर में,

नहीं तो सपने बिखर जायेंगे,

देखो संभल जाना तुम,

नाजुक हैं कहीं गिर जाएंगे,

पता लिखा है तुमने इन पर कहीं,

ढूँढने जाओगे तो मिल जायेंगे,

उखड़े मन से सपनों की बात करते हो,

कदम दर कदम यूँ साथ चलते हो,

फिर भी कहोगे किधर जाएंगे,

सपने हैं फिर तो बिखर जाएंगे,

रोका था तुम्हें इनका साथ लेने से,

तुम क्या हो जो ये समझ जाएंगे,

सपने हैं तो जिंदगी हसीन है,

जो पत्थर से टकराएंगे तो टूट जाएंगे,,

फ़ूलों का क्या है,

टूटे तो पत्थर पर चढ़ जाएंगे,

सपने मेरे हों या तुम्हारे,

देखें हैं तो टूट जाएंगे।।

 

@#ज्ञानेंद्र

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