#Kavita by Harprasad Pushpak

जल का स्वाभाव

जहां गहरा वहीं ठहरा

भीड़ में फंस उत्साह में

होश खोया

विरक्त हो अपनों से

वहुत रोया

परिस्थियां विपरीत

अभिमनयु सा

अकाल बध हो गया

प्रकृति का नियम

लाचार भूमि सूर्य देव

तापने सूर्य देव के

तिल तिल जलाया

जल लुप्त हो

पृथ्वी के आग़ोश में समाया

जब परिस्थितियां हो विपरीत

फिर भी

प्रकृति नही बदल सकती

अपनी रीत

सम्बन्ध भी अनुत्तरित हो जाते हैं

जब बुरे दिन आते हैं

 

परन्तु!

जब समय बलवान

स्वतः निकलता समाधान

प्रोत्साहित करती

जनकल्याण की भावना

राम को अकस्मात वनों में मिलता

हनुमान अंगद सूग्रीव का साथ

नल नील भील वानर भी

सत्कर्म में आ जाते हैं साथ

जब अच्छे दिन आते हैं

 

तब

अहंकारी रावण

बन्धु वाधवो

सोने की लंका के साथ

समूल नष्ट हो जाता है

जब पाप का घड़ा भर जाता है

छदम अधम सब धरे रह जाते हैं

जब अच्छे दिन आते हैं

गीता रामायण का ज्ञान

सावधान!

ओ चतुर सुजान

जब अहंम में

वाचाल करता कुठाराघात

दरिद्र असहाय को सताता है

पृथ्वी पर नारायण का अवतार

अवश्य होता है

मिटाने को पापाचार

भू लोक के

——————-

 

हरप्रसाद पुष्पक

रूद्रपुर(ऊ.सि.नगर)

उत्तराखण्ड

मो.99277 21977

216 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.