# Gazal by Harprasad Pushpak

गजल (मुस्कुरा कर जिन्दगी) .. कलम पुष्पक की

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मुस्कुरा कर जिंदगी को पार कर ।

वेवजाह यूं न कोई तकरार कर ।।

 

तू समझता ही रहा वो है तेरी ।

जर जमीं पे इतना न एतवार कर।।

 

वेतहासा दोड़ता तू किस लिये ।

जीता कहां तू जिन्दगी को हार कर।।

 

भूलकर रब को खुदा खुद हो गया ।

अब रो रहा है जिंदगी दो चार कर ।।

 

कोठी बंगला कार में सुख ढूंढता ।

वेहूदगी की सारी हदें पार कर ।।

 

दो घडी़ पुष्पक खुशी पायी कहां?

रोता रहा बस झूठ का व्यापार कर ।।

 

वे सलीका ही रहा तू आज तक ।

अब क्या सोचे जिन्दगी से हार कर

हरप्रसाद पुष्पक

रूद्रपुर(ऊ.सि. नगर)

उत्तराखण्ड

मो.099277 21977

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