#Kavita by Indradev Bharti

मातृ दिवस पर

————————————————–

माँ !

तेरी कोख ने

हमें नौ महीने तक

अपना ख़ून पिलाया ।

हमें ढोया, और असहनीय

पीड़ा सहकर हमें जन्मा ।

अपना अमृत पिला कर पाला ।

हमें संस्कारों में ढाला ।

माँ ! इस एक जन्म में क्या

ऐसे सहस्त्र-सहस्त्र जन्म लेकर भी

हम तेरे इस मातृ ऋण से

उऋण नहीं हो सकते ।

एतदर्थ  तेरे  श्री चरणों  में

सकल सृष्टि का सादर प्रणाम ।

 

——————–इन्द्रदेव भारती

 

16 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.