#Kavita by Ishq Sharma

यहीं होती तो लोरी सुना देती..

मेरी माँ मुझे यूँ ही सुला देती..

 

बच्चा  ही  अगर रह पाता मैं..

गोदी उठाके झूला झूला देती..

 

परियों की वो कहानी सुनाके..

दुःख दर्द मेरे सारे भूला देती..

 

पलकों में  अश्क़  जो आता..

हँसा के  मेरा पेट फूला देती..

 

होती  मुझे  चीज़  पसंद जो..

साहूकार से सारा तुला देती..

 

ठोकर पत्थरों से लगती जो..

डांटके पत्थरों को रुलादेती..

 

तन गर्मी से जलता देखकर..

मेरी माँ मौसम चार बुला देती..

 

यहीं होती तो लोरी सुना देती..

मेरी माँ मुझे यूँ ही सुला देती..  इश्क़ शर्मा प्यार से

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