#Kavita by Ishq Sharma

उड़ना  हर  इंसान  चाहता  है।

परिंदे  की  पहचान चाहता है।

अठखेलियों से हैरान है तौभी।

ज़िन्दगी  में  शान  चाहता  है।

गम के  अलाव बुझा न सका।

ख़ुशी के  पकवान  चाहता है।

अपने  अपनों से बहुत मिला।

शक़्स कोई अंजान चाहता है।

मुसीबतों से वाकिफ़ सदा वो।

होना न  हालाकान चाहता है।

अस्मत रूह की बचा बचाके।

जीना नही भगवान चाहता है।

लगे दर्द  अपना सबको बड़ा।

इंसानों  में  इंसान  चाहता है।

पागलों  तरह  कोई  प्रेम करे।

कोई न  ज्ञानवान  चाहता है।

अनल में तन ये  धूं  धूं जले।

पीड़ा ऐसी शैतान चाहता है।

जी ते जी किसे राहत मिली।

शौहरतऐशमशान चाहता है।

सुकूँ से बिलख कर रो सकें।

कंधा हो  बलवान चाहता है।

अपनों  से  लेनादेना नही है।

औरों से अहसान चाहता है।

रोगऐइश्क़ लगे न किसीको।

ज़िन्दगी आसान  चाहता है।

क़ायनात ऐ इश्क़ कुछ नही।

मरघट में खाली स्थान चाहता है।

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