#Kavita by Ishq Sharma

..ममता (सिर्फ़ शब्द नही)

Here I’m making & converting my own feelings in my simple words…

 

मेरे बचपन में मेरी, तूने पकड़ी जो ऊँगली, तूने चलना सिखाया मेरी माँ।

 

चलते-चलते गिर जाता, बैठ-बैठ के चिल्लाता, तू सुन ले ये पुकार मेरी माँ।

 

मेरे आँसू गिरने से, पहले तू चली आ, मुझे सीने से लगा ले मेरी माँ।

 

यूँ तो हर कोई खड़ा है, मुझे गोद में लेने को, मुझे तू ना छोड़ना मेरी माँ।

 

मुझे बाँध ले पल्लू में, माँ तेरा लल्लू मैं, सुकूँ आये ना ज़मी पे मेरी माँ।

 

तेरी बाते मैं सुनु, तुझे ताक-झाँक देखूँ, कछु समझ ना आये मेरी माँ।

 

तू जो पुचकारे मारे, लाड करे बड़े प्यारे, छोड़-छोड़ सारे काम मेरी माँ।

 

तुझे रोने मैं ना दूँगा, तुझे खोने मैं ना दूँगा, दूँगा ढेर सारा प्यार मैं भी माँ।

 

कोई भूल जो हो जाये, गर मना ना तुझे पाये, मुझे माफ़ कर देना भगवान्।

 

हैं माँ जैसा ना कोई, मेरी पहचान यही, मेरी माँ ही हैं मेरी जान (प्राण)।

 

 

© इश्क़शर्माप्यारसे – 9827237387

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