#Kavita by Ishq Sharma

इश्क़ु •••••••••••••••••••

है चकाचौंध चारो ऒर रौशनी ही रौशनी हैं।
होत अँधेरा दिया तले बात नही भूलनी हैं।
माटी,माटी के मोल बिके तौभी ज्यादा लगता है।
पकते पेट की आग में बात नही भूलनी है।
आज फटा नही बम उसे बीन के फटा येंगे।
ये त्योहार कैसे मनता मना के वो दिखायेंगे।
हिंदी हो या चीनी मतलब नही वो रखते है।
ख़ुशी दे जो ख़ुशी से वो नाम उसी का बकते है।
मैंने देखा हाल गरीब का आज वो बेहाल है।
घटती नही गरीबी ये बढ़ती हर साल है।
मोटा पेट माला-माल हर एक साहू-कार है।
भ्रष्टाचार में लिप्त यहाँ ये सोती सरकार है।
आकार दे के माटी को यहाँ ढ़ेरी लगा बैठे हैं।
आस में की बिकेंगे सारे नज़रें गड़ा बैठे हैं।
आई धरा पे माटी को हर रोज वो झड़ाते हैं।
फोड़ के फटाके सारी रात धुँआ वो उड़ाते हैं।
कैसे बचें अब ये धरा में साँस कैसे पंछी लें।
दांव पेंच सारे झूठे नियम सारे है लची ले।
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इश्क़ु = हर पंक्ति में सत्रह वर्ण
© इश्क़शर्माप्यारसे✍ 9827237387

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