#Kavita by Jasvant Khatik

 खुशियों की दीवाली
आओ सब मिल कर मनाये खुशियों की दीवाली
मिट्टी के दिये जलाके फैलाए चहुँओर खुशहाली
जगमग जगमग दिप जलेंगे पटाखे खूब चलाएंगे
आपस में गले लगाकर प्यार का दीपक जलाएंगे
खुशियों का त्यौहार दीवाली खुशी सबको बाटेंगे
सबका मुँह मीठा करवा कर द्वेष से कन्नी काटेंगे
सबके घर में खुशियां आये दीप दान सभी करेंगे
ग़रीबो के घरों में रोशन हो पाए घी के दिए भरेंगे
बड़े जलाए बच्चे जलाए दीपों से जगमग संसार
एक दूजे के साथ रहकर बढ़ जाता है देखो प्यार
खुशियों की बौछार व जीवन का उपहार दीवाली
घर साफ़ व निर्मल होते दीपों का त्योहार दीवाली
रंग बिरंगे रंगों से सब घर आँगन में रंगोली सजाते
नए नवेले कपड़े पहन कर प्यार के गीत गुनगुनाते
“जसवंत”करता अर्जी आपसे मन से दीप जलाओ
 राग द्वेष,भेदभाव मिटाके,मिलके दीवाली मनाओ
      “दीवाली की शुभकामनाओं के साथ”
कवि जसवंत लाल खटीक
गाँव -रतना का गुड़ा ,पोस्ट – ननाणा , तहसील- देवगढ़
जिला – राजसमंद ( राजस्थान ) पिन – 313332
मोबाईल न. 8505053291
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