# Kavita by Jasveer Singh Haldhar

करगिल दिवस पर -शहीदों की याद

—————————————–

भारत ने  जीता  युद्ध  मगर  हमने बेटों को  हारा था ।

थर थर कांपी मेरी छाती जब योद्धा अंगन उतारा था ।।

इस भीषण युद्ध विभीषिका में हमने भी लाल गवाए है ,

कुछ ऐसे वीर बाँकुरे थे जो कांधे पर घर आये है ,

आँगन में अर्थी रखी देख दो शब्द गगन में डोल रहे ,

बिटिया तुतला कर पूंछ रही मेले पापा कूँ नां बोल लहे ,

बच्ची की करुण पुकारों से टूटा नभ से इक तारा था ।

भारत ने जीता युद्ध मगर हमने बेटों को हारा था ।।1

माँ अपनी छाती पीट पीट सर मार रही थी धरती पर ,

पत्नी भी होश गवा बैठी गिर पड़ी पती की अर्थी पर ,

बापू धीरे से सुबक रहे अब राजू मेरा रूठ गया ,

भाई भभक भभक रोता अब बाजू मेरा टूट गया ,

नदि भाँती बिलख रही विधवा का छूटा एक किनारा था।

भारत ने जीता युद्ध मगर  हमने बेटों को  हारा था ।।2

चूड़ी टूटी बिछुए उतरे सिंदूर भाल का  पिघल गया ,

पायल टूटी कंगने उतरे गल मंगल बंधन निकल गया ,

कोने में बहना बिलख रही रक्षा का बंधन टूट गया ,

चाची तायी बूआ रोयीं अब कुल का नंदन रुठ गया ,

रोये बचपन के सब साथी क्या यार हमारा प्यारा था ।

भारत ने जीता युद्ध मगर हमने बेटों को हारा था ।।3

अंबर में बदरी घिर आयी शायद वर्षा थी आने को ,

व्याकुल दिखती मुझको वो भी आँखों से नीर बहाने को ,

मेघो में दामिनी चमक चमक यूँ तड़ित चाप दर्षाती थी ,

मानो योद्धा बलिदानों पर वो दमक  दमक हर्षाती थी ,

बूढ़ी दादी रो रो कहती मेरा तो वही सहारा था ।

भारत ने जीता युद्ध मगर हमने बेटों को हारा था ।।4

आदेश मांगती थी सेना आगे बढ़ने को घाटी में ,

हम अवसर पुनः गवां बैठे समझौतों की परिपाटी में ,

ये  कैसी जीत हुई”हलधर” शोणित सस्ते में बहा दिया ,

पीओके हासिल करने का फिर मौका हमने गवा दिया ,

यदि अटल फैसला ले ले लेते पूरा कश्मीर हमारा था ।

भारत ने जीता युद्ध मगर  हमने बेटों को हारा था ।।5

हलधर -9897346173

Leave a Reply

Your email address will not be published.