#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

गीतिका – ना करो विवश रो जाने को

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दे रहा निमंत्रण तुम्हें प्रभु आतुर हूँ आज बुलाने को ।

सुन लो मेरी दारुण पुकार ना करो विवश रो जाने को ।

मन का हर कोना सूना है खुसबू इस घट में दान करो ,

व्याकुल नैना मेरे मालिक पत्थर में दर्शन पाने को ।

मैं निराधार सा बैठा हूँ नीरस जीवन में आश लीये ,

कविता में मीत बनो भगवन गीतों में रस उपजाने को ।

उजियारा तुमने दान दिया सूरज  की पहली किरण संग,

रो रो काटी सारी रतियाँ दीपक संग तिमिर मिटाने को ।

ये आँखें खोज रहीं तुमको सदियां बीती युग गुजर गए ,

लख चौरासी चक्कर काटे “हलधर”ये जीवन पाने को ।

हलधर -9897346173

 

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