#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

गीत -धरापुत्र
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गाँव गली की धूल फांककर बड़ा हुआ है ।
तुफानो के शूल झेलकर खड़ा हुआ है ।।
तपते शोलों औ लपटों के बीच पला है ।
समय समय पर सत्ताओं ने उसे छला है ।।
अब तक नहीं मरा जो मौसम की मारों से ।
शासन की मारों से घायल पड़ा हुआ है ।।
तुफानो के शूल झेलकर खड़ा हुआ है ।।1।।
पथरीली राहों पर देखो रोज चला है।
जूते पाँव नहीं है नंगे पाँव जला है ।।
सरकारों ने रौंदा तोडा और मरोड़ा ।
धरापुत्र फिर भी सत पथ पर अड़ा हुआ है ।।
तूफानों के शूल झेलकर खड़ा हुआ है ।।2।।
गेंहू की बाली में दाना कब आयेगा ।
मंडी में दानों से सोना कब पायेगा ।।
कब आयेगी कानों की बाली बेटी की ।
कर्जे के गड्ढे में वह तो गढ़ा हुआ है ।।
तूफानों के शूल झेलकर खड़ा हुआ है ।।3।।
कर्जे का दानव कब तक उसको खायेगा ।
उसका बेटा ही लड़ने शरहद जायेगा ।।
हलधर “प्रश्न पूछता है सत्ताधीशों से ।
किसने दोष भाग्य में उसके जड़ा हुआ है ।।
तूफानों के शूल झेलकर खड़ा हुआ है ।।4।।
हलधर -9897346173

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