#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

मुक्तिका-चिंगारी मज़हब की
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हद से ज्यादा ठीक नहीं है खातिरदारी मज़हब की ।
ना समझे तो आग लगा देगी चिंगारी मज़हब की ।
हथियारों का धंधा है ये नंबरदारी मज़हब की ,
धरती को बंजर करती है झूठी यारी मज़हब की ।
मानवता से बड़ी नहीं है कोई सेवा दुनियाँ में ,
आदम को शैतान बनाती दावेदारी मज़हब की ।
यदि भगवान एक ही है तो नई दुकानें क्यों खोली ,
पत्थर को भगवान बताती पैरोकारी मज़हब की ।
हाल सीरिया का देखो सब सत्य समझ में आएगा ,
खाता पीता मुल्क निगल गयी ये बीमारी मज़हब की ।
भूख गरीबी से लड़ने को रस्ते पुरखों ने खोजे ,
अब तो खून उन्हीं का पीती चौकीदारी मज़हब की ।
बंदूकों के साये में आयत पढ़वाई जाती हैं ,
ऐ के छप्पन से बहती है क्यों मक्कारी मज़हब की ।
देश धर्म से ऊपर “हलधर” सेवा कर्म हमारा है ,
राष्ट्र गान पर हावी ना हो ,मारामारी मज़हब की ।
हलधर -9897346173

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