#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

-रावण नाम है मेरा
—————————–
रावण नाम है मेरा मैं ही राम की याद दिलाता हूँ !
ऐक बार जलाते हो मुझको मैं तुमको रोज जलाता हूँ !!
मैं मानव का असुर रूप हर घट होता वास मेरा !
अहंकार के विकट रूप के कारण होता नाश मेरा !!
अत्याचार और हिंसा सब मेरे ही पता ठिकाने हैं !
व्याभिचार अभिमान रूप सब ही जाने पहचाने हैं !!
ईश्वर को शत्रु मान मान अपना असतित्व मिटता हूँ !
ऐक बार जलाते हो मुझको मैं तुमको रोज जलाता हूँ !!1!!
कितना भी तुम प्रयत्न करो मुझे जग से मिटा न पाओगे !
घट घट में जिंदा रहता हूँ किस बिधी तुम मुझे भगाओगे !!
पुतले से दहन नहीं मेरा तुम अन्तर्मन में दहन करो !
ना ही शोषण करो और ना ही तुम शोषण सहन करो !!
हर इक मनुज आधार मेरा हर युग में पाया जाता हूँ !
ऐक बार जलाते हो मुझको मैं तुमको रोज जलाता हूँ !!2!!
कुछ योगी योग साधना से अंदर ही मुझे जलाते हैं !
जो काम याव हो जाते हैं वो राम कहाये जाते हैं !!
बढ़ना मेरा है बहुत सरल पर घटना नहीं स्वभाव मेरा !
मानस को नीचा दिखलाता जब भी बढ़ता प्रभाव मेरा !!
हलधर ” योगी मानस को ही मैं अपना शीश झुकाता हूँ !
ऐक बार जलाते हो मुझको मैं तुमको रोज जलाता हूँ !!3!!
हलधर -9897346173

Leave a Reply

Your email address will not be published.