#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

-अमर जवान
——————————
भारत माँ का रक्षक हूँ मैं आग से आग बुझाता हूँ ।
अपने लहू की बूंदों से माँ की तस्वीर सजाता हूँ ।।
चट्टानों से लड़ता हूँ और रेगिस्तान पठारों से ।
बर्फीले तूफानों से नदिया की उफनती धारों से ।
सर्द गर्म मौसम से लड़ता बेरहम कड़कती रातों में ।
मैं भी दूल्हा बन जाता हूँ टैंकों की बारातों में ।
अपने जन गण मन की खातिर मौत से भी लड़ जाता हूँ ।
भारत माँ का रक्षक हूँ और आग से आग बुझाता हूँ ।।1
मैं भारत वाहिनी का नायक मुझे छंद व्याकरण नहीं आते ।
मैं गीत आग के गाता हूँ मुझे काव्य अलंकरण नहीं भाते ।
मैं भगत सिंह का वंशज हूँ मुझे गांधीवाद नहीं आता ।
सीमा पर आग उगलता हूँ झूठा संवाद नहीं आता ।
अपनी रायफल साज बनाकर वंदेमातरम गाता हूँ ।
भारत माँ का रक्षक हूँ और आग से आग बुझता हूँ ।।2
मैं मात भवानी का अनुचर और चौकीदार शिवालय का ।
मैं रण चंडी का सहचर हूँ और पहरेदार हिमालय का ।
मैं शांति दूत हूँ शिव जी का मैं महाकाल का हस्ताक्षर ।
मैं अमर आत्मा अमर नाथ मैं स्वयं शम्भू का बीजाक्षर ।
अरि का अहंकार हरने मैं नरसिंह भी बन जाता हूँ ।
भारत माँ जा रक्षक हूँ और आग से आग बुझाता हूँ ।।3
(बड़ी कविता का आंशिक भाग)
जसवीर सिंह “हलधर”-9897346173

Leave a Reply

Your email address will not be published.