#Kavita By Jasveer Singh Haldhar

कविता – नारी
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नारी नर से सदा बड़ी है ।
गाथा जिसकी भरी पड़ी है ।

जब भी मौका मिला उसे वो ,
हर मौके पर खूब लड़ी है ।

नर क्या जाने नारी कीमत ,
नारायण की एक कड़ी है ।

आदम को इंसान बनाती ,
गौरा शंकर साथ खड़ी है ।

घड़ा पांच रुपये में मिलता ,
लाख टके की मिले घड़ी है ।

तुलना करना काम मूर्ख का ,
शब्दों की बस कथा जड़ी है ।

भाव उभर जो भी मन आया,
हलधर” जोड़ी पुष्प लड़ी है ।

हलधर -9897346173

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