#Kavita By Jasveer Singh Haldhar

बरसाने की होली
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मधुमासी फाग बुखार चढ़ो ,
बृज नार कटिली रसीली लगें ,
मोहन टोली जब आन चढ़े ,
राधा की संग सहेली भगें !

ढप ढ़ोल मृदंग यूँ बाज रहे ,
बृज रंग तरंग उमंग चढ़ी ,
रंग डारि कै सुद बुद भूल गयीं,
हेरत माधव को खड़ी खड़ी !

बरसावें रंग नवल मोहन ,
भीगे लहंगा चुनर चोली ,
फिर फिर कै वार करें राधा ,
मारें लठिया औ रंग रोली !

कर धार लयीं सबने लठियाँ ,
थक हार गयी राधा सखियाँ ,
सब टूट पड़ीं माधव पै यूँ ,
गुड पै भिनगें जैसे माखियाँ !
हलधर -9897346173

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