#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

मकड़जाल

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दिन में मीठे वचन सुहाने ,

रात में नारी संग किलोल ।

बाबा ढेरों पर ना भागो ,

अब तो खुल गयी सारी पोल ।।

जा कर देखो आश्रमों में ,

पी पी पर मधु लाल हो रहे ।

भाग्य विधाता भारत भू के ,

धरा पूत कंकाल हो रहे ।।

खून पी रहे हैं समाज का ,

शासन के संग करके झोल ।

बाबा ढेरों पर ना भागो ,

अब तो खुल गयी सारी पोल ।।1।।

दो दो बिस्से के टुकड़ों में ,

जीवन सारा लोग गुजारें ।

चंद महीनो या सालों में ,

इनकी बन जाती मीनारें ।।

दौलत इतनी कैसे आयी ,

राखे न कोई इसकी तोल ।

बाबा ढेरो पर ना भागो ,

अब तो खुल गयी सारी पोल ।।2।।

मानस भृमित मनो वृति का ,

लाभ उठाते  ढोंगी सारे ।

बाबाओं के मकड़ जाल में,

फस जाते हैं ये बेचारे ।।

चका चौंध की मारी नारी ,

जानें नहीं अस्मत का मोल ।

बाबा ढेरों पर ना भागो ,

अब तो खुल गयी सारी पोल ।।3।।

दीवारों पर नाम राम का ,

अंदर अस्मत लूटी जाती ।

वेदों की पावन माटी की ,

देखों किस्मत फूटी जाती ।।

हलधर “कूए में तो झांको ,

कितनी रस्सी कहाँ पै डोल ।

बाबा ढेरों पर ना भागो ,

अब तो खुल गयी सारी पोल ।।4।।

हलधर —9412050969

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