#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

मुक्तिका -कवि धर्म

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घने आतंकी  सायों को ,बताओ कौन छांटेगा ।

कराहती भारती के जख्म, बोलो कौन पाटेगा ।।

शजर बारूद के बोये हैं देखो इक पडोसी ने ।

अगर मैंने नहीं काटे तो, बोलो कौन काटेगा ।।

यहाँ देखो सहादत पर सियासत डेरा डाले है ।

यदि पूंछोगे नेता से बोल ,कर साफ नांटेगा ।।

जरा नजदीक आने दे समंदर अपनी लहरों को ।

अगर मैं डर गया इनसे इन्हें फिर कौन डाँटेगा ।।

मेरा अर्पण शहीदों को श्राद तर्पण शहीदों को ।

भाव यहाँ काम ना आया ,कहाँ फिर धूल चाटेगा ।।

अगर “हलधर “ही चुप बैठा लगेगा कौम पर धब्बा ।

मेरी माँ भारती का दर्द ,बोलो कौन बांटेगा ।।

हलधर -9412050969

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