#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

दोहे -दिवाली

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1

घर में जमा कबाड़ तो ,दिया पर्व पर झाड़ ।

मन में जमे कलेश को ,मूर्ख फेंक उखाड़ ।।

2

दीप जला घर को सजा ,कर भू को आवाद ।

पुरखों को ना भूलना ,सच्चा छाया वाद ।।

3

सेवा जो करते सदा ,घर के सेवादार ।

घटिया व् सस्ते उन्हें ,क्यों देते उपहार ।।

4

जिनके क़दमों में सदा ,ठोकें रोज सलाम ।

उनको वो उपहार क्यों ,जिसके ऊँचे दाम ।।

5

सूरज जैसा बन सकूँ ,जुगनू का अरमान ।

दिनकर पहचाना नहीं ,हलधर “तू नादान ।।

हलधर -9897346173

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