#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

गीत -कौन बचाये

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धरा पूत अर्थी पर लेता !

बोलो उसको कौन बचाये !!

स्वागत करते घने अँधेरे ,

छुट गयी पीछे रोशनियाँ !

कर्जे से पसरा सन्नाटा ,

रोज डराता ब्याजू बनियाँ !

आँखों के आगे छाये हैं ,

आँधी बरसातों के साये !

बोलो उसको कौन बचाये !!1

गुर्राते रोजाना उस पर ,

जन्तु सींग नाखूनों वाले !

हाथों की रेखा को खायें ,

काले काले खूनी छाले !

घूम रही जंगली आंधियाँ ,

कैसे उनसे फसल रखाये !

बोलो उसको कौन बचाये !!2

तीखी काँटेदार हवायें ,

उसकी किस्मत से उलझी हैं !

चट्टानों से टकरा कर भी ,

जीवन लीला ना सुलझी है !

सरकारी फाइल में अटके ,

उसकी खटिया के चौपाये !

बोलो उसको कौन बचाये !!3

रेतीले टीले में गुम है ,

उसके जीवन की रस धारा !

दिशा हीन फूटी सलीव पर ,

टूटा हुआ मिला ध्रुव तारा !

नंगा बदन ठिठुरता पशु धन ,

कोहरा उसको रास ना आये !

बोलो उसको कौन बचाये !!4

खेती ऐसा कंचन मृग है ,

इसे खोजने जो भी आया !

राम सरीखे देवों ने भी ,

मरते तक ना सुख पाया !

कितने “हलधर ” डूब गये हैं ,

कितने अब तक गये जलाये !

बोलो उसको कौन बचाये !!5

 

हलधर – 9897346173

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