#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

गीत – सामने बादल घने हैं

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हाथ में छाले पड़े हैं ,पैर कीचड़ में सने  हैं !

मौत से होती लड़ाई, सामने बादल घने हैं !

एक सपना था हमारा चाँद तारों तक उड़ेंगे ,

टूट जायें पंख बेसक नभ सितारों से जुड़ेंगे ,

आसमानी हौंसलों से देवता भी अनमने हैं !

मौत से होती लड़ाई सामने बादल घने हैं !!1

भारती की रंगशाला ना हमें तो रास आयी,

व्याज ने लूटी हमेशा खेत की सारी कमायी ,

युद्ध मौसम से लड़े हैं लोह के चावे चने हैं !

मौत से होती लड़ाई सामने बादल घने हैं !!2

हम विदुर से हो गए है कौरवों में पांडवों में ,

दर्द गायब है हमारा धर्म के इन तांडवों में ,

हम गलीचों से बिछे हैं शामयानों में तने हैं !

मौत से होती लड़ाई सामने बादल घने हैं !!3

घिर रहे काले अँधेरे नाविकों की बस्तियों पर ,

लहर ने खाये मछेरे मौत लौटी कस्तियों पर ,

सिंधु पर लंका सरीखे सेतु “हलधर “बांधने हैं !

मौत से होती लड़ाई सामने बादल घने हैं !!4

हलधर -9897346173

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