#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

गीत -शीत लहर

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शीत लहर में बर्फ बने हैं मेरे मन के गीत !

हिम प्रदेश में घवराये हैं शब्दों के सुर मीत !

अपना मुखड़ा लगे पराया ओढ़े सर पर खेस ,

ठिठुरन में पूरे कस्बे का बदल गया परिवेश ,

परिवर्तन का ये उपक्रम क्यों होता कठिन प्रतीत !

शीत  लहर  में  बर्फ  बने  हैं  मेरे  मन  के  गीत !!1

घने कोहरे के जंगल में खोये सारे चित्र ,

सई सांझ घर में घुस जाते अपने प्यारे मित्र ,

मौसम के तीखे बाणों से हुए सभी भयभीत !

शीत लहर में बर्फ बने हैं मेरे मन के गीत !!2

प्रकृति का क्रम है ये तो डरने की क्या बात ,

सर्द गर्म ऋतुओं की बेला जैसे दिन औ रात ,

वर्तमान का हर इक पल अगले पल बने अतीत !

शीत  लहर  में  बर्फ  बने  हैं  मेरे  मन  के गीत !!3

अंगारे भी लगें दहकते जैसे सुर्ख गुलाब ,

चलता राही रुक जाता है देखे जला अलाव ,

कोशिश कर “हलधर “ने साधे छंदों में संगीत !

शीत  लहर में  बर्फ बने  हैं  मेरे मन  के  गीत !!4

हलधर -9897346173

 

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