#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

गीत -मैंने गीत बनाये गए

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मैंने गीत बनाये गाये !

सन्नाटों ने भी दोहराये !!

पत्थर से फूटी चिंगारी ,

सुबक सुबक रोई फुलवारी !

दूर देश से छुपा कटारी ,

डाकू बन सौदागर आये !

मैंने गीत बनाये गाये !!

पीछे छूटा गाँव बसेरा ,

घाटी में सपनों का डेरा !

छुट गयी पीछे रोशनियाँ ,

आँधी में दीपक मुरझाये !

मैंने गीत बनाये गाये !!

आतंकों ने पाँव पसारे ,

योद्धा आज गये कुछ मारे !

बीच बजार खड़े बेचारे ,

मुर्दों ने पत्थर बरसाये !

मैंने गीत बनाये गाये !!

लाल हुआ है रंग नदी का ,

मसला सबसे बड़ा सदी का !

आग लगी केसर घाटी में ,

किसने आ बारूद बिछाये !

मैंने गीत बनाये गाये !!

सात दसक से बना तमासा ,

लोक तंत्र की झूठी आशा !

माली बना बाग का दुश्मन ,

संविधान खुद पर सर्माये !

मैंने गीत बनाये गाये !!

रास नहीं आयी आजादी ,

क्या लगता इनका बगदादी !

हलधर “सीधे गोली मारो ,

हाथ तिरंगा जो ना पाये !

मैंने गीत बनाये गाये !!

हलधर -9897346173

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