#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

कविता – कई पीढ़ियों की गाथाएँ

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मेरे अंतर मन में रहती ,कई पीढ़ियों की गाथाएँ !

लहू शिराओं में बहती हैं , महासमर की युद्ध कथाएँ !!

पुरखों का ये गाँव बसा है इंद्रप्रस्थ यमुना के तट पर !

नस्लों का परिणाम फसा है आज हस्तिनापुर के अंदर !

खेल जुए का अब भी जारी ,चीर हरण होता द्रोपद का !

अंधे युव राजों के नीचे होती अब भी मूक सभाएं !

मेरे अंतर मन  में रहती कई पीढ़ियों की गाथाएँ !!1

बोद्ध गया का परिसर देखा वैशाली के शिलालेख भी !

कौशांबी की लाट देखकर जाना पुरखों का विवेक भी !

गौतम देश देश में घूंमे दुनियाँ ने उनके पग चूमे !

अपना राष्ट्र मलीन हो गया काम न आयी मर्यादाएं !

मेरे अंतर मन में रहती कई पीढ़ियों की गाथाएँ !!2

पांडव स्वर्ग सिंधार गए हैं गद्दी पर बैठे दुर्योधन !

राजनीति के गलियारों से लूट रहे हैं मनमाना धन !

विदुर नीति भी गौण हो गयी ,माधव गीता ज्ञान खो गया !

कलयुग के इस कोलाहल में मूक हो गयी वेद ऋचायेँ !

मेरे अंतर मन में रहती कई पीढ़ियों की गाथाएँ !!3

भारत माता मांग रही है लेखा अब बीते सालों का !

किसके पास बही खाता है घाटी में सोये लालों का !

कितनी चूड़ी टूट गयी हैं कितनी सेजें रुंठ गयी हैं !

दिल्ली खोज नहीं पायी है “हलधर “अब भी सही दिशाएँ !

मेरे अंतर मन में रहती कई पीढ़ियों की गाथाएँ !!4

हलधर -9897346173

 

 

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