#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

-धरती माता

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बिन मांगे सब कुछ दे डाला ,कोई विश्लेषण नहीं किया !

माता तुमने सब दान दिया , कोई सर्वेक्षण नहीं किया ! !

तुम खुशियों का भंडार गृह , तुम ऋण को धन करने वाली ,

नभ की ऊर्जा को शोधित कर , तुम संवर्धन करने वाली ,

संज्ञा संज्ञा ही रहने दी ,कभी कर्म विशेषण नहीं किया !

बिन मांगे सब कुछ दे डाला ,कोई विश्लेषण नहीं किया !!1

दुर्दांत कुमति को बुद्धि दी ,मानस को ज्ञान दिया तुमने ,

इस निराकार चंचल मन को ,साकार निदान दिया तुमने ,

प्राणो को मुक्त मार्ग सौंपा ,अपना अनुमेषण नहीं किया !

बिन मांगे सब कुछ दे डाला ,कोई विश्लेषण नहीं किया !!2

लालच से पोषित आदम ने ,देही का दोहन कर डाला ,

सब रत्न निकले सिने से ,छाती को भेदन कर डाला ,

अपने भावुक संवेदन को ,तुमने सम्प्रेषण नहीं किया !

बिन मांगे सब कुछ दे डाला ,कोई विश्लेषण नहीं किया !!3

ना कोई शर्त रखी माता , ना ही कोई अनुबंध किया ,

आंतों की अनल बुझाने का ,तुमने सबका प्रबंध किया ,

हलधर” को अन्न दिया तुमने ,कोई अंकेक्षण नहीं किया !

बिन मांगे सब कुछ दे डाला , कोई विश्लेषण नहीं किया !!4

हलधर -9897346173s

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