#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

कविता -जिंदगी

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जिंदगी कड़े तेबर तेरे ,

फिर भी तू मुझको भाती है !

जो जैसा है जो भी कुछ है ,

तू सबको गले लगाती है !!

पिंजड़े में फँसकर देख लिया ,

विपदा में हँसकर देख लिया !

सौ बार नदी को पार किया ,

धारा में धँसकर देख लिया !

तू मानस का हर मौके पर ,

भेजा भी खूब चबाती है !

जो जैसा है जो भी कुछ है ,

तू सबको गले लगाती है !!1!!

जागें सब  तेरे संग संग ,

भागें सब  तेरे संग संग !

साँसों का माँझा बना रखा ,

डोरी हैं  सब तू है पतंग !

कब तू कट के गिर जाएगी ,

हर पग पर राज छुपाती है !

जो जैसा है जो भी कुछ है ,

तू सबको गले लगाती है !!2!!

तू कभी महकती बाहों में ,

तू कभी चहकती राहों में !

नखरे भी तेरे बहुत बड़े ,

तू कभी दहकती आहों में !

आँसू भी देती आँखों में ,

मीठी भी नींद सुलाती है !

जो जैसा जो भी कुछ है ,

तू सबको गले लगाती है !!3!!

लेखक की लिखी कहानी सी ,

नाड़ी में बहता पानी सी !

तू शकुंतला की उंगली से ,

खोई दुष्यंत निशानी सी !

जाने कब रंग बदल देती ,

हलधर ” से गीत गवाती है !

जो जैसा है जो भी कुछ है ,

तू सबको गले लगती है !!4!!

हलधर -9897346173

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