#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

देश गीत -हे भारत माता नमन नमन

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हे  भाग्य।  विधाता नमन नमन ,

हे   भारत   माता    नमन नमन ।

जयजनगणमन जयजनगणमन ,

जयजनगणमन जयजनगणमन ।।

मस्तक तेरे नगपति प्रहरी ,

जो खड़ा सजग है सदियों से ।

तेरे आंगन की हरियाली ,

सब सजी हुई है नदियों से ।

चूसा है तेरा खून बहुत ,

राजाओं औ सुल्तानों ने ।

घावों पर नमक लगा डाला,

गोरे आका शैतानो ने ।

सोने की चिड़िया कहते थे ,

सुंदर था तेरा घर आंगन ।

जयजनगणमन जयजनगणमन ।।1

जब दासी तुझे बना डाला,

स्वार्थ में अंध कपूतों ने ।

नाखूनों से बेड़ी काटी ,

तेरे बलिदानी पूतों ने ।

गोरों की गर्दन काट काट ,

रानी ने तुझे सजाया था ।

शोणित बदले आजादी का,

नारा सुभाष ले आया था ।

जाने कितने ही वीरों ने ,

जीवन अपना कर दिया दहन ।

जयजनगणमन जयजनगणमन ।।2

अरि के मस्तक से मुकुट छीन ,

तेरे सिर तक जो लाये थे।

कुछ भूखे रहे बीहड़ों नें ,

कुछ सजा मौत की पाये थे ।

कुछ ऐसे जालिम नेता थे ,

जो बलिदानों को भूल गये ।

सत्ता सुख पाने की खातिर ,

मजहब की गोदी झूल गये ।

गोरों की चाल नहीं समझे ,

कर डाला आँचल का विघटन ।

जयजनगणमन जयजनगणमन ।।3

अब तेरी रण हुंकारों से,

कोलाहल सा छा जाता है ।

जिस ओर नजर तेरी घूमे ,

भूगोल बदल सा जाता है ।

तू अहंकार की शोषक है ,

विद्दुत है तेरी धारों में ।

हर जगह राज चलता तेरा ,

गिर रेगिस्तान पठारों में ।

हलधर “जैसे बेटे तेरे ,

लेखन में जिनके भरी अगन ।

जयजनगणमन जयजनगणमन ।।4

हलधर -9897346173

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