#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

गीत -सफर बहुत पथरीला

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थोड़ा सूखा थोड़ा गीला ,

हलधर सफर बहुत पथरीला !

जीवन जीना पड़े जगत में ,

ये कैसी नारायण लीला !!

बचपन बाद जवानी आई ,

चहरे पर छायी तरुणाई !

रोग भोग उपक्रम कर देता ,

सुंदर सजे गात को ढीला !

थोड़ा  सूखा थोड़ा गीला ,

हलधर सफर बहुत पथरीला !!1

रात अँधेरी तिमिर डराता  ,

सूरज पूरे दिवस जलाता !

चाँद दिखाये ठेंगा पल पल ,

फिरता घट बढ़ हो चमकीला !

थोड़ा सूखा थोड़ा गीला ,

हलधर सफर बहुत पथरीला !!2

ऊपर गरुड साँप है नीचे ,

खाय चोट यदि आँखें मींचे !

सिर पर आग पाँव में पानी ,

फिर भी माने नहीं हठीला !

थोड़ा सूखा थोड़ा गीला ,

हलधर सफर बड़ा पथरीला !!3

फसल ठीक पक कर यदि आये ,

मंडी का दल्ला खा जाये !

हाथ दाम कुछ भी ना लागे ,

सम्मुख खड़ा कर्ज का टीला !

थोड़ा सूखा थोड़ा गीला ,

हलधर सफर बहुत पथरीला !!4

हलधर -9897346173

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