kavita by Jasveer Singh Haldhar

गीत -माया , मौत रूप ठगनी के

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नए  रंग  भरती  पल  पल  में , हरे  पेड़  की  डाल ।

गले मिलीं फिर अलग हो गयीं , देख हवा की चाल ।

बुरा भले के संग मिले तो ,खूब उठाये लाभ ,

गंदा पानी गंगा जल में ,हो जाता अमिताभ ,

झूठ और सच उलझ बनाते ,एक अनौखा जाल ।

नए रंग भरती पल पल में  , हरे पेड़ की डाल ।।1

सत्य मार्ग पर चलना यारो ,है अब टेडी खीर ,

भीड़ भाड़ में रहे अकेला ,भार बने सच पीर ,

जन्नत का तो पता नही पर ,जीवन हो बदहाल ।

नए रंग भरती पल पल में ,हरे पेड़ की डाल ।।2

स्वर्ग लोक की करे कल्पना ,नही मनुज का काम ,

धरती पर ही आ सकता है ,भक्ति  योग से राम ,

पूरा जोर काम पर राखो ,नही बजाओ गाल ।

नए रंग भरती पल पल में ,हरे पेड़ की डाल ।।3

मृत्यू जीवन की सच्चाई ,नही किसी पर रोक ,

रूप बदलने की क्रिया पर,करते नाहक शोक ,

माया, मौत रूप ठगनी के ,हलधर”बदले खाल ।

नए रंग भरती पल पल में ,हरे पेड़ की डाल ।।4

हलधर -9897346173

 

 

 

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