#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

मुक्तिका -मिट्टी का घर

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सपने जब भी आता है मिट्टी का घर ।

याद पुरानी दे जाता है मिट्टी का घर ।

कंकरीट के पिंजरे में तन कर बैठा हूँ ,

दर्पण मुझको दिखलाता है मिट्टी का घर ।

जब भी ऊंची बिल्डिंग ऊंची बातें करती,

इतिहास उन्हें समझाता है मिट्टी का घर ।

छोटे लोगों के ऊंचे ताने सुनता जब ,

गुस्से में आ धमकाता है मिट्टी का घर ।

होटल आज बना बैठा है घर सुखिया का ,

रो रो कर कथा बताता है मिट्टी का घर ।

जब भी सड़कें रौब दिखाती महानगर का ,

पूरा गांव उठा लाता है मिट्टी का घर ।

हलधर “सोचो क्या खोया क्या पाया जग में,

सारा चिट्ठा लिखवाता है मिट्टी का घर ।

हलधर -9897346173

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