#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

गीत- धूप के डेरे

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धूप के डेरे उठे अब दून से ,

डोलियां बरसात की आने लगी ।

चल पड़ी देखो हवायें सिंधु से ,

शुष्क मौसम अब रसीला हो गया ।

मेघ नगपति शीश टकराने लगे ,

चोटियों का गात गीला हो गया ।

रंग धरती का हरा होने लगा ,

आसमां में नित घटा छाने लगी ।

धूप के डेरे उठे अब दून से ,

डोलियां बरसात की आने लगी ।।1

रूप बदले बादलों का कारवां ,

आह क्या छायी अनौखी सी छटा ।

चाँद तारों से मिचौली खेलती ,

घूमती है चाँदनी में इक घटा ।

फिर सुबह रवि को ढकेगी देखना ,

सात सुर की रागनी गाने लगी ।

धूप के डेरे उठे अब दून से ,

डोलियां बरसात की आने लगी ।।2

हलधर -9897346173

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