#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

-क्यों

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भीतर  सन्नाटा  पसरा  है बाहर  बाहर शोर क्यों ।

साहूकार जिसे माना था वो ही निकला चोर क्यों ।

तन से साफ दिखाई देता मैन में जिसके मैल है ,

देह रूप से दिखे देवता अंतस आदम खोर क्यों ।

सहज सरल दिखलाई देता है पक्का शैतान वो ,

मजहब का चोला पहने ये आतंकी घनघोर क्यों ।

मेरी कविता को पढ़कर क्यों खड़े हो गये कान है ।

सबसे कम अनुभव वाला ही नेता रामकिशोर क्यों ।

नंदी की पीछे पीछे ज्यों दौड़ा भूखा सिंह है ,

मैया के वाहन से बोलो शिव वाहन कमजोर क्यों ।

बैठे बैठे कविता लिख दी देखे सिर ना पैर भी ,

पाठक “हलधर “की कविता से होंवें भाव विभोर क्यों ।

हलधर -9897346173

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