#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

मुक्तिका -जब से बदरा जल बरसाए

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चैतन्य तरुण हो गयी धरा जब, से मेघा जल बरसाए ।

कोयल ने राग विरह छोड़ा, मल्हार राग फिर दुहराए ।

धरती मल मैल क्षरण करके, देखो नव यौवन पाया है ,

हरियाली है सब हरा भरा  ,ऊपर से मेघ दूत आए ।

झीनी झीनी सी बौछारें ,हम सबको जीवन देती हैं ,

अवनी की कोख हरी करने, मेघा आये मेघा आए ।

बंजर का मंजर टूट रहा ,धरती से अंकुर फुट रहा ,

तितली उपवन में डोल रही ,नव रंग पंखुरी फैलाए ।

गुस्सा भी अपना दिखा रहे ,मानस को संयम सिखा रहे ,

क्रोधित हो जब फटते मेघा ,घर बार मवेसी घबराए ।

गिरिराज हिमालय निकली ,निर्झरणी का यौवन देखो ,

मदमस्त उफनती धारों से ,तटबंध किनारे सरमाए ।

हलधर -9897346173

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