#Kavita by ] Jasveer Singh Haldhar

कविता पर कविता
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कल्पना और विचारों की तकरार है कविता ।
मानस को ब्रह्म का मधुर उपहार है कविता ।।
मन में तरंगे उठें जब नदिया की लहरों सी ।
कवि मन के द्वन्द्द का छंद उदगार है कविता ।।
कोई वक्त से हारा किसी को वक्त ने मारा ।
कुछ को पढ़ने के लीये अखबार है कविता ।।
कभी व्योम में सोती कभी कौम पर रोती ।
गगन का धरा के संग व्यवहार है कविता ।।
ना बंधों में बंधी है ना छंदों में सदी है ।
कभी उपमा तो कभी अलंकार है कविता ।।
सरहद की रक्षा में बहे सबकी सुरक्षा में ।
वीरों के लहू की बहती धार है कविता ।।
क्रांति उद्घोषक कभी ये शांति की पोषक ।
धर्म का अधर्म पर ऐक प्रहार है कविता ।।
तितली ,भँवरों में कभी लैला गजरों में ।
गुर्वत में हो जाती कभी लाचार है कविता ।।
किसी की जिंदगी में तो किसी की बंदगी में ।
किसी के लीये हुई कारोबार है कविता ।।

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