#Kavita by Jayati Jain Nutan

कविता – एक सफर ।

 

भागती दौड़ती जिंदगी का एक सफर ऐसा भी रहा

दिल सहमा, मुस्कुराये होंठ से जीवन आगे बढ़ा ।

साथ मिला अपनों का, संगीदिल साथ रहे

नूतन परिस्थतियों के नूतन आगाज़ रहे ।

दृणता हृदय में भरकर, वाणी मृदु लिए

छोड़ संताप तेज़ कदमों से चल दिये ।

वर्चस्व स्थापित करने को कोशिशें नयी हुई

संघर्ष से जीवन की नई उड़ान भरी ।

संस्कृति, सभ्यता औऱ नैतिकता तीनों साथ लिए

एक पूर्ण औरत होने का स्वाभिमान लिए ।

कुरीतियों को समाज से मिटाने के लिए

अबलाओं को अपनत्व से आगे बढ़ाने के लिए ।

दुर्व्यवहार भी हुआ, ठोकरें भी खानी पड़ी

आत्मरक्षा को प्रतिक्षण प्रयत्नशील रही ।

एक मोड़ ऐसा भी आया ठहरे पानी सा जीवन रहा

नयी राह बना बह निकलने को मन आतुर रहा ।

बीज के अंकुरण की तरह नयी दिशा मिली

खुद से जंग जीतने की नई राह चुनी ।

तेज़ बहाव की तरह फिर बह निकली जिंदगी

तेज़ बहाव पीड़ा, रोग, अनिंद्रा बहा कर ले गया।

प्रफुल्लित हुआ नाखुश धुंधला मन दर्पण

संग संग जीने के नए आयाम स्थापित कर गया ।

 

लेखिका – जयति जैन ‘नूतन’

भोपाल ।

 

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